दर्दे जज्बात हुस्ने आबाद

ये हुस्न ये अदा एक गजब नजारा है
कहे क्या दम देखने वालो का निकले जा रहा है
दिल से पूछो छुरियो के निशान छोड़ जाता है
खुद बनाते नहीं अल्फाज निकल जाते है
हसिनाओ के हुस्न की तारीफ में
बिन पूछे गुस्ताखी कर जाते है
दिल का क्या करे वो ताकता रह जाता है
जुबा पे कंट्रोल कर लिया जज्बात में बह के शब्द निकल ही जाता है
कितना भी करो कंट्रोल धरा रह जाता है
वो हुस्न ही क्या जिसको देख कर कविता न निकले
शब्दों को लिखना आसान हो जाता है
जब कोई खूबसूरत चेहरा अपनी शह छोड़ जाता है