प्रेम का बहकना

वो ऐसे गुजरे पास से हमारे, हमने खुद को खोते देखा है
दिल को पकड़ना चाहा हमने, नजरों को जूझते देखा है
स्वांस लेने की कोशिश की हमने, हवाओं को पीछा करते देखा है
आग लगी मन में, जुल्फों में बादलों को घुमड़ते देखा है
होश काबू कैसे करू, आँखों के महखाने में पीते देखा है
धीरज मेरा छूट रहा, हाथों को आवारगी करते देखा है
शांत मन मेरा निश्छल, पदचिन्हों पे चलते देखा है
ऐ हुस्न क्यों तड़पाये मन को, तेरा होने को दिल करता है

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें