एक बच्चा संसार में आता है
करोड़ों बुराई पाकर डर जाता है
डर कर बच्चा जोर से चिल्लाता है
चीख सुन माँ सहम जाती है
पल भर सीने से लगा छुपाती है
भुख में बच्चा फिर रोता है
माँ को पल में समझ आ जाता है
जिस दुनिया के लिए पल्लू नहीं सरका,
बच्चे की खातिर, पूरा स्तन निर्वस्त्र हो जाता है
तब पहला दूध पी पाता है
घुटरुन चलता माँ की सीने पे,
लोट लगाता हाथो में, हर अंग हाथो से सजाती है
कमर पकढ़ चलना सिखाती,
हाथ पकढ़ खाना सिखाती,
कलम पकढ़ लिखना सिखाती है
एक-एक जूठी हरकत में, लड़ कर पापा से बचाती है
छोटी सी बीमारी पे, रात भर जाग आँसू बहाती है
खुद तिल-तिल कर मर कर,
बच्चे को इन्सान बनती है
खुद भूखी हो कर भी उसको पहले खिलाती है
चाहे वो कितना भी तंग करे,
ख़ुशी-ख़ुशी हँसके सब सह जाती है
फिर तू मुर्ख ह्रदय हीनं इन्सान,
देवी को छोड़ बाहर चला जाता है
बीवी में हो मस्त, माँ को भूल जाता है
गलती से भी कोई सूचना छोटी सी छींक की भी,
माँ को मिल जाती है
तड़प उठता है दिल आत्मा दुखी हो जाती है
फिर भी माँ की याद में, कोई औलाद वापस नहीं आती है
माँ ने बच्चे को जोड़ा, याद में खुद टूटती चली जाती है
सावन का त्यौहार
आयो रे आयो रे, घनघोर सावन आयो रे
रिमझिम बूंदों का सागर, तपती धरा की प्यास बुझाने आयो रे
झुलसी कलियों में नव संचार, पुष्पों की मुस्कान खिलाने आयो रे
माटी की सुगंध, भवरों का गुंजन, हर शाख पे नूतन ले आयो रे
कल-कल, चल-चल करती बुँदे, नदियों का कोलाहल ले आयो रे
नृत्य में लय, सुर में ताल, मृदंग बजाता आयो रे
कवियों में सृजन, संगीत में नव गीत सजाने आयो रे
योवन में तरंग, प्रेम में सतरंग, उमंगों में उल्लास ले आयो रे
चेतन मन में हर्षोल्लास, चंचल चितवन में मधु पराग भरने आयो रे
मृत जीवन के कण-कण में, प्राण रूपी अमृत भरने आयो रे
बन प्रेमिका सावन की, झुमो नाचो गाओ रे
हर बूंद पे गीत सजाओ रे
सावन की रिमझिम बूंदों का भी एक त्यौहार मनाओ रे
आयो रे आयो रे, घनघोर सावन आयो रे
रिमझिम बूंदों का सागर, तपती धरा की प्यास बुझाने आयो रे
झुलसी कलियों में नव संचार, पुष्पों की मुस्कान खिलाने आयो रे
माटी की सुगंध, भवरों का गुंजन, हर शाख पे नूतन ले आयो रे
कल-कल, चल-चल करती बुँदे, नदियों का कोलाहल ले आयो रे
नृत्य में लय, सुर में ताल, मृदंग बजाता आयो रे
कवियों में सृजन, संगीत में नव गीत सजाने आयो रे
योवन में तरंग, प्रेम में सतरंग, उमंगों में उल्लास ले आयो रे
चेतन मन में हर्षोल्लास, चंचल चितवन में मधु पराग भरने आयो रे
मृत जीवन के कण-कण में, प्राण रूपी अमृत भरने आयो रे
बन प्रेमिका सावन की, झुमो नाचो गाओ रे
हर बूंद पे गीत सजाओ रे
सावन की रिमझिम बूंदों का भी एक त्यौहार मनाओ रे
आयो रे आयो रे, घनघोर सावन आयो रे
प्रेम सम्भोग
शाम मे नशा, मन मे शरारत है
दिल मे तड़प, उमंगो मे हिमाकत है
होटो मे प्यास, आँखों मे इजाजत है
जिव्हा मे मदिरा, तन मे हरारत है
बदन मे तनाव, यौवन मे कसावट है
उरोजो मे उठान, योनी मे तरावट है
बारिश की बुँदे, जिस्मों को भिगावत है
भीगा वस्त्र, सुंदर रूप को दिखावत है
आँखों का तीर, गोरी को निहारत है
हाथों का जाल, वक्क्षो को छिपावत है
प्रेमी का हाथ, कूल्हों को सहलावत है
यौवन कलश, सीने मे छुपावत है
अधरों की मदिरा, पीने को सर झुकावत है
अधरों से अधरों का मिलन, सांसों को महकता है
जिव्हा स्पर्श, प्रेम मे वासना भर जाता है
पंख चीर मदिरा सागर, को मथ उफान उठाता है
मृदु अमृत, प्रेमी की प्यास बुझाता है
वस्त्र भार बन, तन से निकल जाता है
निवस्त्र यौवन, कामेन्द्रियाँ विचलित कर जाता है
चुचियों का गहरा घेरा, अधरों को ललचाता है
हो व्याकुल प्रेमी, बच्चा बन जाता है
स्तन पीता, चूचुकों को चुभलाता है
लिंग देख, योनी प्यारी, इठलाता है
अकड़-अकड़ के, योनी को रिझाता है
पा निमंत्रण, योनी मुस्कराती है
रह-रह के अपना, मधु बहाती है
होटो मे प्यास, जीभ मे तड़प भर जाती है
योनी रस को पीने, छत्ते मे घुस जाती है
दे-दे कर सलामी, लिंग आंसू बहाता है
कोमल अधरों को, लिंग पे प्यार आता है
भर मुंह मे लिंग, जिव्हा सत्कार करती है
उपर नीचे लिंग की, चूसा चाटी करती है
मस्त हो लिंग, अमृत द्वार से निकल आता है
योनी मिलन को, बदन पे छा जाता है
हाथों का बांध, जिस्मों पे जकड़ जाता है
लिंग योनी मे, धीरे-धीरे समा जाता है
होटो से अधरों का, मिलन हो जाता है
हाथ चुचियों को, दबाता सहलाता है
स्त्री का पुरुष से, काम युद्घ छिड़ जाता है
काम-रति नृत्य, शुरू हो जाता है
लिंग योनी पे घर्षण से प्रहार किये जाता है
हर प्रहार पे योनी मुख खुल-खुल जाता है
काम-रस रिसता, लिंग नहलाता जाता है
साँसों मे तुफान,
आवेगों मे उफान,
अंगों मे भूचाल,
आहो मे चीख भर जाता है
वासना का ज्वार कुछ पलों में बह जाता है
सृष्टि का प्रकृति से मिलन पूर्ण हो जाता है
एक नये पौधे का बीज प्रकृति को दे जाता है
दिल मे तड़प, उमंगो मे हिमाकत है
होटो मे प्यास, आँखों मे इजाजत है
जिव्हा मे मदिरा, तन मे हरारत है
बदन मे तनाव, यौवन मे कसावट है
उरोजो मे उठान, योनी मे तरावट है
बारिश की बुँदे, जिस्मों को भिगावत है
भीगा वस्त्र, सुंदर रूप को दिखावत है
आँखों का तीर, गोरी को निहारत है
हाथों का जाल, वक्क्षो को छिपावत है
प्रेमी का हाथ, कूल्हों को सहलावत है
यौवन कलश, सीने मे छुपावत है
अधरों की मदिरा, पीने को सर झुकावत है
अधरों से अधरों का मिलन, सांसों को महकता है
जिव्हा स्पर्श, प्रेम मे वासना भर जाता है
पंख चीर मदिरा सागर, को मथ उफान उठाता है
मृदु अमृत, प्रेमी की प्यास बुझाता है
वस्त्र भार बन, तन से निकल जाता है
निवस्त्र यौवन, कामेन्द्रियाँ विचलित कर जाता है
चुचियों का गहरा घेरा, अधरों को ललचाता है
हो व्याकुल प्रेमी, बच्चा बन जाता है
स्तन पीता, चूचुकों को चुभलाता है
लिंग देख, योनी प्यारी, इठलाता है
अकड़-अकड़ के, योनी को रिझाता है
पा निमंत्रण, योनी मुस्कराती है
रह-रह के अपना, मधु बहाती है
होटो मे प्यास, जीभ मे तड़प भर जाती है
योनी रस को पीने, छत्ते मे घुस जाती है
दे-दे कर सलामी, लिंग आंसू बहाता है
कोमल अधरों को, लिंग पे प्यार आता है
भर मुंह मे लिंग, जिव्हा सत्कार करती है
उपर नीचे लिंग की, चूसा चाटी करती है
मस्त हो लिंग, अमृत द्वार से निकल आता है
योनी मिलन को, बदन पे छा जाता है
हाथों का बांध, जिस्मों पे जकड़ जाता है
लिंग योनी मे, धीरे-धीरे समा जाता है
होटो से अधरों का, मिलन हो जाता है
हाथ चुचियों को, दबाता सहलाता है
स्त्री का पुरुष से, काम युद्घ छिड़ जाता है
काम-रति नृत्य, शुरू हो जाता है
लिंग योनी पे घर्षण से प्रहार किये जाता है
हर प्रहार पे योनी मुख खुल-खुल जाता है
काम-रस रिसता, लिंग नहलाता जाता है
साँसों मे तुफान,
आवेगों मे उफान,
अंगों मे भूचाल,
आहो मे चीख भर जाता है
वासना का ज्वार कुछ पलों में बह जाता है
सृष्टि का प्रकृति से मिलन पूर्ण हो जाता है
एक नये पौधे का बीज प्रकृति को दे जाता है
मनुष्य,काम,प्रेम और आत्मा
प्रकृति ने हर जीव को काम दिया है
ईश्वर ने मनुष्य को काम के साथ प्रेम दिया है
हे निष्ठुर इन्सान प्रेम के साथ सम्भोग कर
तेरा जीवन रस से भर जायेगा
रोम-रोम प्रफुल्लित हो जायेगा
अन्यथा देह शांत हो जायेगी
आत्मा बिन प्रेम, घुट के रह जायेगी
आत्म घुटन से जीवन मशीन बन जायेगा
शारीर भी सम्भोग का साथ नहीं दे पायेगा
देह संचालन के लिए भोजन जरूरी है
वासना शांति के लिए सम्भोग जरुरी है
आत्म संतुष्टि के लिए प्रेम जरूरी है
ईश्वर ने मनुष्य को काम के साथ प्रेम दिया है
हे निष्ठुर इन्सान प्रेम के साथ सम्भोग कर
तेरा जीवन रस से भर जायेगा
रोम-रोम प्रफुल्लित हो जायेगा
अन्यथा देह शांत हो जायेगी
आत्मा बिन प्रेम, घुट के रह जायेगी
आत्म घुटन से जीवन मशीन बन जायेगा
शारीर भी सम्भोग का साथ नहीं दे पायेगा
देह संचालन के लिए भोजन जरूरी है
वासना शांति के लिए सम्भोग जरुरी है
आत्म संतुष्टि के लिए प्रेम जरूरी है
वक्क्षो की मादकता
वक्क्षो पे सर रखने को दिल करता है
चोटी पे मिटने को दिल करता है
ऊँचाई से पिघलने को दिल करता है
घाटी मे डूबने को दिल करता है
स्वछंद कमलो को छु लेने को दिल करता है
प्रेम भरे कलशो मे सागर-मंथन को दिल करता है
प्यासे होटो मे भर लेने को दिल करता है
भँवरा बन, कैद होने को दिल करता है
चोटी पे मिटने को दिल करता है
ऊँचाई से पिघलने को दिल करता है
घाटी मे डूबने को दिल करता है
स्वछंद कमलो को छु लेने को दिल करता है
प्रेम भरे कलशो मे सागर-मंथन को दिल करता है
प्यासे होटो मे भर लेने को दिल करता है
भँवरा बन, कैद होने को दिल करता है
प्रेमी की तड़प भरी प्रेम पत्रिका
नाजुक हुस्ने, शरबती हसीना,
नशीली, मस्तानी ऐ शोख अदाओ वाली,
क्यूँ इतना सितम ढा रही है
तेरी जुल्फों की काली घटाओ से टपकती बुँदे,
बदन पे गिर, नशे में भिगोये जा रही है
चंचल मृगनयनी आंखे,
मुझे नीले सागर में डुबोये जा रही है
गालो की प्यारी, पतले रसवन्ती अधरों की लाली,
अमृत पान का निमंत्रण दिए जा रही है
घाटी की गहराई मुझे निगले जा रही है
मखमली कमल पुष्प की गोलाई,
मदहोश किये जा रही है
कमल पुष्प की शाखे,
नश्तर बनके कलेजे को चीरे जा रही है
नाभि चितवन, कमर स्पन्दन,
रह-रह कर मुझे कमजोर किये जा रही है
बाहों की अमर बेल,
जंजीर बनके जकड़े जा रही है
उफ़.. उसपे कयामत ढाती कच्ची कली,
हाय मेरी जान लिए जा रही है
उसपे तेरी शोख अदाये, चंचल भंगिमाये,
मेरी हसरतो में तूफान पैदा किया जा रही है
ठहर नहीं पाउँगा, रुक नही पाउँगा
प्रेम सागर में डूबके ही, शांत हो पाउँगा
हे जालिम कातिल हसीना,
मेरी मर्दानगी तुझपे निसार कर जाऊंगा
फूलो सी महकती मधु पराग कली को,
ताह उम्र ही फूल बनाऊंगा
एक-एक मुस्कान पे,
प्रेम का असीम सागर लुटाऊंगा
हर अदा के नखरे उठाऊंगा
इसे गुलामी न समझ,
तेरा पागल प्रेमी ही कहलाऊंगा
हसीन गोरा बदन हीरो से सजाऊंगा
पुष्पों की हर महक से,
कोमल तन-मन महकाऊंगा
हाँ का इंतजार है
प्रेम मेरा लुटने को बेकरार है
हसरतो का इंतजार है
दिल मेरा मरने को तैयार है
क्या अर्थी उठने का इंतजार है
सोच मत, रुक मत,
कण-कण तेरे प्रेम का तलबगार है
नशीली, मस्तानी ऐ शोख अदाओ वाली,
क्यूँ इतना सितम ढा रही है
तेरी जुल्फों की काली घटाओ से टपकती बुँदे,
बदन पे गिर, नशे में भिगोये जा रही है
चंचल मृगनयनी आंखे,
मुझे नीले सागर में डुबोये जा रही है
गालो की प्यारी, पतले रसवन्ती अधरों की लाली,
अमृत पान का निमंत्रण दिए जा रही है
घाटी की गहराई मुझे निगले जा रही है
मखमली कमल पुष्प की गोलाई,
मदहोश किये जा रही है
कमल पुष्प की शाखे,
नश्तर बनके कलेजे को चीरे जा रही है
नाभि चितवन, कमर स्पन्दन,
रह-रह कर मुझे कमजोर किये जा रही है
बाहों की अमर बेल,
जंजीर बनके जकड़े जा रही है
उफ़.. उसपे कयामत ढाती कच्ची कली,
हाय मेरी जान लिए जा रही है
उसपे तेरी शोख अदाये, चंचल भंगिमाये,
मेरी हसरतो में तूफान पैदा किया जा रही है
ठहर नहीं पाउँगा, रुक नही पाउँगा
प्रेम सागर में डूबके ही, शांत हो पाउँगा
हे जालिम कातिल हसीना,
मेरी मर्दानगी तुझपे निसार कर जाऊंगा
फूलो सी महकती मधु पराग कली को,
ताह उम्र ही फूल बनाऊंगा
एक-एक मुस्कान पे,
प्रेम का असीम सागर लुटाऊंगा
हर अदा के नखरे उठाऊंगा
इसे गुलामी न समझ,
तेरा पागल प्रेमी ही कहलाऊंगा
हसीन गोरा बदन हीरो से सजाऊंगा
पुष्पों की हर महक से,
कोमल तन-मन महकाऊंगा
हाँ का इंतजार है
प्रेम मेरा लुटने को बेकरार है
हसरतो का इंतजार है
दिल मेरा मरने को तैयार है
क्या अर्थी उठने का इंतजार है
सोच मत, रुक मत,
कण-कण तेरे प्रेम का तलबगार है
दाल में तिनका
क्या बात है जनाब, मुरझाया भवरा इतना केसे खिल रहा है
मुझे तो दाल में काला तिनका दिख रहा है
राज हो कोई कबूल लो जानी,
पछताओगे बाद में, हो जायेगी परेशानी
है अगर बाकी, ताले खोल दो
छुपे हुए राज शब्दों में तोल दो
पता लग गया भाभी को, हो जायेगी बदनामी
तेरा क्या जायेगा प्यारे, नाक हम दोस्तों की कट जायेगी
तेरे किये की सजा सब को भुगतनी पढ़ जायेगी
मुझे तो दाल में काला तिनका दिख रहा है
राज हो कोई कबूल लो जानी,
पछताओगे बाद में, हो जायेगी परेशानी
है अगर बाकी, ताले खोल दो
छुपे हुए राज शब्दों में तोल दो
पता लग गया भाभी को, हो जायेगी बदनामी
तेरा क्या जायेगा प्यारे, नाक हम दोस्तों की कट जायेगी
तेरे किये की सजा सब को भुगतनी पढ़ जायेगी
तितिल्यो की उड़ान
नाम है तितली, पंख फड़फड़ाने देना
नाजुक बदन है कहीं बिखरा न देना
हजार रंग भरे, ये पंख जिन्दगी रंगीन कर देंगे
गलती से भी इन्हें संगदिल हाथो में न पंहुचा देना
गर एसा हुआ बाग उजड़ जायेगा
लाख कोशिक करके भी
कोई माली आबाद नही कर पायेगा
पंख विहीन तितली मुरझा जायेगी
फूलो की खुशबु बिन तितली के खो जायेगी
फिर भंवरा केसे पुष्प रस पान कर पायेगा
बिन खुशबु के, बर्बाद हो जायेगा
आत्मा रूपी तितली उड़ने देना जीवन रूपी नाव को अविरल बहने देना
जालिम इन्सान नहीं, उसकी कुत्सित भावनाये होती है
अच्छा न बनो फिर भी, बुराई प्रविष्ट मत होने देना
अहम जीवन को बर्बाद कर देता है
आत्म ज्योति, अंधकार में डुबो देता है
ताकत की पहचान
तितली की नाजुकता ही दे सकती है
फूलो की खुशबु,
आत्मा को प्रेम रस से भर देती है
तितलिया उन्ही के बाग की शोभा बढाती है
जिनका खून पसीना बनके सींचता है
दुसरो की खीज का अनुसरण कमजोर लोग करते है
ताकतवर इन्सान ही फूलो के मालिक बनते है
प्यार से इनके रंग को अपने में भर लो
जिंदगी हसीन रंगीन हो जायेगी
हर खुशबु नशीली हो जायेगी
नाजुक बदन है कहीं बिखरा न देना
हजार रंग भरे, ये पंख जिन्दगी रंगीन कर देंगे
गलती से भी इन्हें संगदिल हाथो में न पंहुचा देना
गर एसा हुआ बाग उजड़ जायेगा
लाख कोशिक करके भी
कोई माली आबाद नही कर पायेगा
पंख विहीन तितली मुरझा जायेगी
फूलो की खुशबु बिन तितली के खो जायेगी
फिर भंवरा केसे पुष्प रस पान कर पायेगा
बिन खुशबु के, बर्बाद हो जायेगा
आत्मा रूपी तितली उड़ने देना जीवन रूपी नाव को अविरल बहने देना
जालिम इन्सान नहीं, उसकी कुत्सित भावनाये होती है
अच्छा न बनो फिर भी, बुराई प्रविष्ट मत होने देना
अहम जीवन को बर्बाद कर देता है
आत्म ज्योति, अंधकार में डुबो देता है
ताकत की पहचान
तितली की नाजुकता ही दे सकती है
फूलो की खुशबु,
आत्मा को प्रेम रस से भर देती है
तितलिया उन्ही के बाग की शोभा बढाती है
जिनका खून पसीना बनके सींचता है
दुसरो की खीज का अनुसरण कमजोर लोग करते है
ताकतवर इन्सान ही फूलो के मालिक बनते है
प्यार से इनके रंग को अपने में भर लो
जिंदगी हसीन रंगीन हो जायेगी
हर खुशबु नशीली हो जायेगी
वासना,ताकत और प्रेम
शब्दों में अहंकार की बू आती है
हर लफ्ज पे ताकत, घमंड बन जाती है
क्या कलियों की खुशबु लेगा,
सोच पे मदिरा का कुहास नजर आती है
वासना जहर बन नसों में भर गयी है
प्रेम की गरिमा, अंधकार में खो गयी है
कर ले कोशिश लाख मगर,
गुलशन भी गुल में मुरझाये बिना नही रह पायेगा
प्रेम की एक किरन है काफी,
पूरा गुलिस्ता दिलो की घाटी में महक जायेगा
हर लफ्ज पे ताकत, घमंड बन जाती है
क्या कलियों की खुशबु लेगा,
सोच पे मदिरा का कुहास नजर आती है
वासना जहर बन नसों में भर गयी है
प्रेम की गरिमा, अंधकार में खो गयी है
कर ले कोशिश लाख मगर,
गुलशन भी गुल में मुरझाये बिना नही रह पायेगा
प्रेम की एक किरन है काफी,
पूरा गुलिस्ता दिलो की घाटी में महक जायेगा
प्रेमी प्रेमिका की दुरी से प्राप्त मिलन की अधीरता
सजनी त्यौहार मना कर आयीं है
दुरिया दिल में तूफान भर के लायी है
कुछ तो मिलने में वक़्त लग जायेगा
वरना इस प्रेमी का दिवाला निकल जायेगा
दो वक़्त उन्हें अपनी हसीना के प्रेम रस पान का
वरना एक प्यारा दोस्त, कलियों का प्रेमी
जंजीरों में जकड़ जायेगा
मुझे न कहना याद नही दिलाया था
दीपक बुझने से क्यूँ नहीं बचाया था
जलने दो उसको भी अपनी प्रेमिका के प्यार में
बिखरने दो उसके अहसास को हसीन तूफान में
भाटा उतर जायेगा, उपस्थिति दर्ज करा जायेगा
दुरिया दिल में तूफान भर के लायी है
कुछ तो मिलने में वक़्त लग जायेगा
वरना इस प्रेमी का दिवाला निकल जायेगा
दो वक़्त उन्हें अपनी हसीना के प्रेम रस पान का
वरना एक प्यारा दोस्त, कलियों का प्रेमी
जंजीरों में जकड़ जायेगा
मुझे न कहना याद नही दिलाया था
दीपक बुझने से क्यूँ नहीं बचाया था
जलने दो उसको भी अपनी प्रेमिका के प्यार में
बिखरने दो उसके अहसास को हसीन तूफान में
भाटा उतर जायेगा, उपस्थिति दर्ज करा जायेगा
हसीन अदाओ का प्रेम जाल
हसीन अदाओ का जब जाल बिछ जायेगा
तेरा पूरा वजूद जलवों के जाल में फस जायेगा
कातिल निगाहों का जादू काली घटा बन कर
अखियों के रास्ते तेरी रग-रग में असीम नशा भर जायेगा
बाहों की सलाखों का मखमली पिंजरा जब बदन पे कब्जा जमायेगा
शरीर का कतरा-कतरा भूकम्प के झटके खायेगा
तू लाख कोशिश कर ले मर्दानगी का हर जज्बा दम तोड़ जायेगा
हर लम्हा अरे पगले वही दफन हो जायेगा
कब्र में दफन एहसास को केवल यही याद आयेगा
जान मेरी कर दो रहम इस बीमार पर
ये उबलता ज्वालामुखी बिना फटे नही रह पायेगा
जिन्दगी वीरान है बिन तेरे
हूँ गुलाम तेरे प्रेम का तेरे अहसासों के सजदे करता चला जायेगा
तेरा पूरा वजूद जलवों के जाल में फस जायेगा
कातिल निगाहों का जादू काली घटा बन कर
अखियों के रास्ते तेरी रग-रग में असीम नशा भर जायेगा
बाहों की सलाखों का मखमली पिंजरा जब बदन पे कब्जा जमायेगा
शरीर का कतरा-कतरा भूकम्प के झटके खायेगा
तू लाख कोशिश कर ले मर्दानगी का हर जज्बा दम तोड़ जायेगा
हर लम्हा अरे पगले वही दफन हो जायेगा
कब्र में दफन एहसास को केवल यही याद आयेगा
जान मेरी कर दो रहम इस बीमार पर
ये उबलता ज्वालामुखी बिना फटे नही रह पायेगा
जिन्दगी वीरान है बिन तेरे
हूँ गुलाम तेरे प्रेम का तेरे अहसासों के सजदे करता चला जायेगा
प्रेमी का प्रेमिका से निशानी मांगना
कातिल हुस्न निसार अपने यार पर
फिर भी यार का दम निकले हुस्न के दीदार पर
माँगी निशानी दिली हसरते निकालकर
सजा आशियाना मेरा तेरी मुस्कराहटो पर
देना साथ दो कांटे भी चुभे मेरे होटो पर
भर निकाल बूंद, गुलाब खुशबु फुल के लिहाफ पर
काफी मेरी सांसे महकाने को तेरे पास आने तक
नशा बनकर तेरा एहसास मुझे भिगो जायेगी
तड़पती प्रेम अगन को कुछ राहत दे जायेगी
फिर भी यार का दम निकले हुस्न के दीदार पर
माँगी निशानी दिली हसरते निकालकर
सजा आशियाना मेरा तेरी मुस्कराहटो पर
देना साथ दो कांटे भी चुभे मेरे होटो पर
भर निकाल बूंद, गुलाब खुशबु फुल के लिहाफ पर
काफी मेरी सांसे महकाने को तेरे पास आने तक
नशा बनकर तेरा एहसास मुझे भिगो जायेगी
तड़पती प्रेम अगन को कुछ राहत दे जायेगी
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