प्रेमी की तड़प भरी प्रेम पत्रिका

नाजुक हुस्ने, शरबती हसीना,
नशीली, मस्तानी ऐ शोख अदाओ वाली,
क्यूँ इतना सितम ढा रही है
तेरी जुल्फों की काली घटाओ से टपकती बुँदे,
बदन पे गिर, नशे में भिगोये जा रही है
चंचल मृगनयनी आंखे,
मुझे नीले सागर में डुबोये जा रही है
गालो की प्यारी, पतले रसवन्ती अधरों की लाली,
अमृत पान का निमंत्रण दिए जा रही है
घाटी की गहराई मुझे निगले जा रही है
मखमली कमल पुष्प की गोलाई,
मदहोश किये जा रही है
कमल पुष्प की शाखे,
नश्तर बनके कलेजे को चीरे जा रही है
नाभि चितवन, कमर स्पन्दन,
रह-रह कर मुझे कमजोर किये जा रही है
बाहों की अमर बेल,
जंजीर बनके जकड़े जा रही है
उफ़.. उसपे कयामत ढाती कच्ची कली,
हाय मेरी जान लिए जा रही है
उसपे तेरी शोख अदाये, चंचल भंगिमाये,
मेरी हसरतो में तूफान पैदा किया जा रही है
ठहर नहीं पाउँगा, रुक नही पाउँगा
प्रेम सागर में डूबके ही, शांत हो पाउँगा
हे जालिम कातिल हसीना,
मेरी मर्दानगी तुझपे निसार कर जाऊंगा
फूलो सी महकती मधु पराग कली को,
ताह उम्र ही फूल बनाऊंगा
एक-एक मुस्कान पे,
प्रेम का असीम सागर लुटाऊंगा
हर अदा के नखरे उठाऊंगा
इसे गुलामी न समझ,
तेरा पागल प्रेमी ही कहलाऊंगा
हसीन गोरा बदन हीरो से सजाऊंगा
पुष्पों की हर महक से,
कोमल तन-मन महकाऊंगा
हाँ का इंतजार है
प्रेम मेरा लुटने को बेकरार है
हसरतो का इंतजार है
दिल मेरा मरने को तैयार है
क्या अर्थी उठने का इंतजार है
सोच मत, रुक मत,
कण-कण तेरे प्रेम का तलबगार है

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