नाम है तितली, पंख फड़फड़ाने देना
नाजुक बदन है कहीं बिखरा न देना
हजार रंग भरे, ये पंख जिन्दगी रंगीन कर देंगे
गलती से भी इन्हें संगदिल हाथो में न पंहुचा देना
गर एसा हुआ बाग उजड़ जायेगा
लाख कोशिक करके भी
कोई माली आबाद नही कर पायेगा
पंख विहीन तितली मुरझा जायेगी
फूलो की खुशबु बिन तितली के खो जायेगी
फिर भंवरा केसे पुष्प रस पान कर पायेगा
बिन खुशबु के, बर्बाद हो जायेगा
आत्मा रूपी तितली उड़ने देना जीवन रूपी नाव को अविरल बहने देना
जालिम इन्सान नहीं, उसकी कुत्सित भावनाये होती है
अच्छा न बनो फिर भी, बुराई प्रविष्ट मत होने देना
अहम जीवन को बर्बाद कर देता है
आत्म ज्योति, अंधकार में डुबो देता है
ताकत की पहचान
तितली की नाजुकता ही दे सकती है
फूलो की खुशबु,
आत्मा को प्रेम रस से भर देती है
तितलिया उन्ही के बाग की शोभा बढाती है
जिनका खून पसीना बनके सींचता है
दुसरो की खीज का अनुसरण कमजोर लोग करते है
ताकतवर इन्सान ही फूलो के मालिक बनते है
प्यार से इनके रंग को अपने में भर लो
जिंदगी हसीन रंगीन हो जायेगी
हर खुशबु नशीली हो जायेगी
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