मनुष्य,काम,प्रेम और आत्मा

प्रकृति ने हर जीव को काम दिया है
ईश्वर ने मनुष्य को काम के साथ प्रेम दिया है
हे निष्ठुर इन्सान प्रेम के साथ सम्भोग कर
तेरा जीवन रस से भर जायेगा
रोम-रोम प्रफुल्लित हो जायेगा
अन्यथा देह शांत हो जायेगी
आत्मा बिन प्रेम, घुट के रह जायेगी
आत्म घुटन से जीवन मशीन बन जायेगा
शारीर भी सम्भोग का साथ नहीं दे पायेगा
देह संचालन के लिए भोजन जरूरी है
वासना शांति के लिए सम्भोग जरुरी है
आत्म संतुष्टि के लिए प्रेम जरूरी है

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