कातिल हुस्न निसार अपने यार पर
फिर भी यार का दम निकले हुस्न के दीदार पर
माँगी निशानी दिली हसरते निकालकर
सजा आशियाना मेरा तेरी मुस्कराहटो पर
देना साथ दो कांटे भी चुभे मेरे होटो पर
भर निकाल बूंद, गुलाब खुशबु फुल के लिहाफ पर
काफी मेरी सांसे महकाने को तेरे पास आने तक
नशा बनकर तेरा एहसास मुझे भिगो जायेगी
तड़पती प्रेम अगन को कुछ राहत दे जायेगी
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