शब्दों में अहंकार की बू आती है
हर लफ्ज पे ताकत, घमंड बन जाती है
क्या कलियों की खुशबु लेगा,
सोच पे मदिरा का कुहास नजर आती है
वासना जहर बन नसों में भर गयी है
प्रेम की गरिमा, अंधकार में खो गयी है
कर ले कोशिश लाख मगर,
गुलशन भी गुल में मुरझाये बिना नही रह पायेगा
प्रेम की एक किरन है काफी,
पूरा गुलिस्ता दिलो की घाटी में महक जायेगा
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